ज़िले के बारे में

डिंडौरी मध्य भारत में स्थित मध्यप्रदेश का एक ज़िला है । डिंडौरी नगर में ज़िले का मुख्यालय स्थित है । ज़िले की स्थापना २५ मई १९९८ को ९२४ गाँवो के साथ की गयी थी । डिण्डौरी जिला, जबलपुर संभाग का एक हिस्सा है। डिण्डौरी जिला कुल ७४७० वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और छत्तीासगढ राज्य की सीमा से लगे मध्यप्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित है। यह उत्तर में उमरिया, पश्चिम में मण्डला, पूर्व में शहडोल से घिरा हुआ है और दक्षिण में छत्तीसगढ राज्य का बिलासपुर जिला है। गणितानुसार ज़िला, अंक्षाश 22.17N और 23.22N देशांतर 80.35E और 80.58E में है । जिले में सात विकासखण्ड है – डिण्डौरी, शहपुरा, मेंहदवानी, अमरपुर, बजाग, करंजिया एवं समनापुर ।

 डिंडौरी का मानचित्रडिंडौरी ज़िला मानचित्र

2011 की जनगणनानुसार, डिंडौरी जिले की कुल आबादी लगभग 7,04,218 है। यह आबादी भूटान राष्ट्र या अलास्का(संयुक्त राज्य अमेरिका) के लगभग है। यह आकड़ा (640 जिलो की कुल मे से ) ज़िले को भारत में 501 की रेंकिग देता है। जिले की जनसंख्या घनत्व 94 निवासी प्रति वर्ग किलोमीटर है । दशक 2001-2011 में ज़िले की जनसंख्या वृद्धि दर 21.26% थी। डिण्डौरी में लिंगानुपात 1000 पुरूषो के मुकाबले 1004 महिलाये है और साक्षरता दर 65.47% है। कुल जनसंख्या का लगभग 64% अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत आता है।

बैगा जनजाति जिले में बहुत ही प्रमुख जनजाति है। वे केवल इस जिले में ही देखे जा सकते है । बैगा जनजाति को राष्ट्रीय मानव के रूप में भी जाना जाता है।

बैगा जनजातिबैगा जनजाति

डिण्डौरी जिले में घुघवा जीवाश्म राष्ट्रीय उद्द्यान स्थितित है, जिसका भारत में एक अनुठा स्थामन है। यह स्थान जीवाश्मों के एक अनमोल अमूल्य ख़जाने से समृध है। यहाँ 18 संयंत्र परिवार की 31 पीढी में से संबंधित जीवाश्मों की पहचान की गई है। यह जीवाश्म कुछ 66 लाख साल पहले इस क्षेत्र में फेले हुए जीवन का प्रतिनिधित्व करते है। यहॉ पर पौधो, पर्वतरोही, पत्ते, फूल, फल, और बीजों के संरक्षित जीवाश्म अच्छी तरह से संरक्षित पाए गये है। यहाँ विशेष रूप से कई पाम जीवाश्म भी पाए गये है। यहाँ पर 66 लाख साल पुराने संयंत्र जीवाश्मों पाये गये है और घुघवा जीवाश्म पार्क में जीवाश्मों की रक्षा के लिए भरपूर प्रयास किये जाते है।

घुघवा जीवाश्म राष्ट्रीय उद्द्यानघुघवा जीवाश्म राष्ट्रीय उद्द्यान

डिण्डौीरी में कई ऐतिहासिक और आध्या़त्मिक स्थानों का अनूठा संग्रह है। आध्यात्मिक स्थान जैसे लक्ष्मीण मढवा, कुर्करामठ, कलचुरीकाली मंदिर एवं कान्हा टाइगर नेश्नल पार्क जो 180 किमी की दूरी पे है एवं बाधंवगढ राष्ट्रीय उद्यान जिसकी दूरी जिला मुख्यारलय से 140 किमी है।

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