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मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना

| सेक्टर: उद्योग नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग
  • योजना का नाम:   मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना
  • योजना का प्रारंभ:  01 अगस्त, 2014
  • योजना का उद्देश्य : योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के बीपीएल श्रेणी के हितग्राहियों को कम लागत के उपकरण तथा/या कार्यशील पूजी उपलब्ध कराई जावेगी। योजना का लाभ नवीन उद्योगों/व्यवसाय आदि की स्थापना हेतु देय होगा। योजना की अर्हता एवं वित्तीय सहायता के प्रावधान निम्नानुसार होगें –
    • परियोजना लागत- अधिकतम रूपये 50,000/-
    • आयु – 18 से 55 वर्ष ।
    • आय श्रेणी – बीपीएल श्रेणी का हो।
    • वित्तीय सहायता – मार्जिन मनी – परियोजना लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम रूपये 15,000/-
  • योजना का क्रियान्वयन:  मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना के क्रियान्वयन के लिए नोडल ऐजन्सी, प्रबंध संचालक, म0प्र0 राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम मर्यादित, भोपाल होगा, तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी/कार्यपालन अधिकारी, जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समितियों के माध्यम से योजना का संचालन कराया जावेगा। योजना के लिए समुचित वित्तीय प्रावधान अनुसूचित जाति कल्याण विभाग द्वारा अपने विभागीय बजट में किया जावेगा, तथा तद्नुसार भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्यों का निर्धारण जिलेवार प्रबंध संचालक, म0प्र0 राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम मर्यादित, भोपाल द्वारा किया जावेगा।
  • पात्रता:
    • योजना का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण मध्यप्रदेश होगा (अर्थात योजना का लाभ उन्हीं उद्यमों को देय होगा, जो मध्यप्रदेश सीमा के अन्दर स्थापित हों)।
    • आवेदक
      • आवेदक अनुसूचित जाति वर्ग का सदस्य हो। (सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र सलंग्न करना होगा)।
      • आवेदन दिनांक को आयु 18 से 55 वर्ष के मध्य हो।
      • किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक/वित्तीय संस्था/सहकारी बैंक का चूककर्ता /अशोधी Defaulter नहीं होना चाहिए।
      • यदि कोई व्यक्ति किसी शासकीय उद्यमी/स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत सहायता प्राप्त कर रहा हो, तो इस योजना के अन्तर्गत पात्र नहीं होगा।
      • सिर्फ एक बार ही इस योजना के अन्तर्गत सहायता के लिए पात्र होगा।
    • योजना उद्योग/सेवा व्यवसाय क्षेत्र के लिए होगी।
  • वित्तीय सहायता:
    • इस योजना के अंतर्गत परियोजना की अधिकतम लागत रुपये 50 हजार होगी।
    • इस योजना के अंतर्गत मार्जिनमनी सहायता परियोजना लागत का 50 प्रतिशत देय होगी।
    • 50 प्रतिशत (अधिकतम रुपये 15,000/-)।
  • आवेदन प्रक्रिया:
    • आवेदक द्वारा निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन पत्र कार्यालय मुख्यकार्यपालन अधिकारी /कार्यपालन अधिकारी, जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास
      समिति, जिला-समस्त में आवश्यक सहपत्रों सहित प्रस्तुत किये जायेंगे। आवेदन पत्र निःशुल्क उपलब्ध होंगे।
    • सभी प्राप्त आवेदन पंजीबद्ध किये जावेंगे।
  • आवेदन पत्रों का निराकरण:
    • उक्त योजना अन्तर्गत प्राप्त आवेदन पत्र योजनान्तर्गत गठित चयन समिति के समक्ष प्रस्तुत किये जावेंगे।
    • प्राप्त आवेदन पत्रों का चयन निम्न चयन समिति द्वारा किया जावेगा:-
      • जिला कलेक्टर/कलेक्टर प्रतिनिधि – अध्यक्ष
      • सहायक आयुक्त/जिला संयोजक, आ0जा0क0 विभाग – सदस्य
      • महाप्रबंधक, जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र – सदस्य
      • जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक – सदस्य
      • मुख्यकार्यपालन अधिकारी/कार्यपालन अधिकारी,
      • जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति मर्यादित – सदस्य-सचिव
    • विभागीय चयन समिति की अनुशंसा उपरांत प्रकरणों के निराकरण हेतु बैंकों को अगे्रषित किया जावेगा।
    • बैंकों द्वारा रिजर्व बैंक के दिशा निर्देश अनुसार बैंक में प्रकरण प्राप्ति के 30 दिवस के अंदर निराकरण किया जावेगा।
    • प्रकरण स्वीकृति के 15 दिवस के अन्दर बैंक के द्वारा ऋण वितरण (disbursement ) प्रारंभ किया जावेगा।
  • मार्जिनमनी सहायता एवं ऋण अदायगीः
    • योजना के लिएः- परियोजना लागत पर 50 प्रतिशत (अधिकतम रु. 15,000/-) मार्जिनमनी सहायता हितग्राही को शासन की ओर से देय
      होगी।
    • आरंभिक स्थगन (moratorium) की न्यूनतम अवधि 6 माह होगी।
    • आरंभिक स्थगन (moratorium) के बाद, ऋण अदायगी 5 वषो में होगी।
  • वित्तीय प्रवाहः-
    • ऋण वितरण के पश्चात् एवं इकाई की स्थापना होने पर, परियोजना लागत पर बैंक शाखा द्वारा मार्जिनमनी सहायता एवं ब्याज अनुदान की राशि
      का क्लेम मुख्यकार्यपालन अधिकारी/कार्यपालन अधिकारी, जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति मर्यादित, जिला-सम्बंधित को किया जावेगा।
  • विविध:
    • बैंक से आशय समस्त राष्ट्रीयकृत बैंक, सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण विकास बैंक से हैं।
    • गलत/भ्रामक जानकारी अथवा गलत तरीके से सहायता प्राप्त करने पर हितग्राही के  विरूद्ध दाण्डिक कार्यवाही की जा सकेगी।
    • हितग्राही द्वारा ऋण/ब्याज के पुनर्भुगतान/भुगतान में डिफाल्ट करने की स्थिति में योजनांतर्गत पूर्व में दी गयी सहायता भू-राजस्व बकाया की
      तरह वसूली योग्य होगी    तथा उक्त परिस्थिति में भविष्य में दी जाने वाली सहायता भी देय नहीं होगी।
    • योजना की व्याख्या/संशोधन हेतु प्रबंध संचालक, म0प्र0 राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम मर्यादित, भोपाल सक्षम होगें।
  • परिभाषाएं:-
    • पूंजीगत लागत एवं कार्यशील पूंजी का योग परियोजना लागत है।
    • परियोजना की स्थापना में हितग्राही के अशंदान के रूप में शासन द्वारा प्रदत्त सुविधा, मार्जिनमनी सहायता कहलाती है।
    • उद्यम प्रारंभ करने के 6 माह पश्चात्, ऋण वसूली की कार्यवाही को आरंभिक स्थगन (moratorium कहलाती है)

आवेदन-पत्र में संलग्न किये जाने वाले सहपत्रों की सूची

  1. राशन कार्ड/स्थाई निवास प्रमाण-पत्र/मतदाता पहचान-पत्र/ड्रायविंग लाईसेंस/आधार प्रमाण पत्र।  (कोई भी एक)
  2. जन्मतिथि संबंधी प्रमाण-पत्र
  3. सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी निःशक्तजन संबंधी प्रमाण-पत्र (यदि लागू हो तो)
  4. सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र
  5. अन्य

लाभार्थी:

 मध्यप्रदेश का मूल निवासी

लाभ:

मार्जिन मनी - परियोजना लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम रूपये 15,000/-

आवेदन कैसे करें

आवेदक द्वारा निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन पत्र कार्यालय मुख्यकार्यपालन अधिकारी /कार्यपालन अधिकारी, जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति, जिला-समस्त में आवश्यक सहपत्रों सहित प्रस्तुत किये जायेंगे। आवेदन पत्र निःशुल्क उपलब्ध होंगे।

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