• Character Spacing
Large Print  Print

डिण्डौरी जिला भारत के ह्दय प्रदेश के दक्षिण पूर्वी भाग जबलपुर संभाग में स्थित है। सन् 1999 में मंडला का विभाजन कर डिण्डौरी जिला बनाया गया था जिसका कुल क्षेत्रफल 7470 स्के.कि.मी. है। यह जिला मेकलपर्वत की श्रेणियों, घने साल के वन तथा पावन नर्मदा नदी से आच्छांदित है। डिण्डौरी जिला दक्षिण पूर्वी भाग में छत्तीसगढ़, पश्चिम में मण्डला, उत्तर में उमरिया, तथा पूर्व में जिला अनूपपुर से अपनी सीमा रेखा छूता है। जिले में कुल 7 ब्लाॅक डिण्डौरी, शहपुरा, मेंहदवानी, अमरपुर, बजाग, करंजिया, समनापुर है। जिला भारत के तथा मध्यप्रदेश के अति पिछड़े क्षेत्र में आता है। डिण्डौरी की भौगोलिक संरचना इसे कठिन तथा दुर्गम क्षेत्र बनाती है जो इस क्षेत्र की प्रगति में बाधा पहुंचाती है। आजादी के 67 वर्ष बाद भी जिले में रेल नेटवर्क तथा विस्तृत सूचना नेटवर्क का नितांत अभाव है। साथ ही जिले में व्यापार एवं धंधे का कोई बडा उपक्रम स्थापित नहीं है। इसके परिणामस्वरूप जिला बेरोजगारी, गुणवत्ताविहीन शिक्षा तथा रोजगार के लिए किये जाने वाले पलायन से ग्रसित है। इनके अतिरिक्त जिले में पर्यटन की दृष्टि से अपार संभावनाए उपलब्ध है जिनका लाभ इस जिले को आने वाले समय में प्राप्त होगा।

प्रोजेक्ट स्वावलंबन के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम
1. व्यवसायिक ट्रेड प्रशि़क्षण कार्यक्रम:

कौशल उन्नयन के क्षेत्र में जिले में विभिन्न विभागों से भिन्न-भिन्न योजनाएं संचालित की जा रही है, इसी तारतम्य में जिला पंचायत डिण्डौरी के मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण में विशेष केन्द्रीय सहायता (आई.ए.पी) के वित्तीय पोषण के तहत आई.एल.एण्ड एफ एस स्कील डेवलपमेंट कार्पोरेशन भोपाल के द्वारा जिले के युवक-युवतियों का चयन कर व्यवसायिक उन्मुखी विभिन्न टेड्स जैसे बी.पी.ओं. हॉस्पीकटालिटि, हॉटेल मैनेजमेण्ट, एवं सिलाई मशीन आपरेटर, के क्षेत्र में प्रशिक्षण देते हुए प्रतिष्ठित संस्थानों में रोजगार उपलब्ध कराने की योजना को साकार कर रही हैं।

इसके अंतर्गत संस्थान के द्वारा विगत माह दिसम्बर 2014 से आज दिनांक तक प्रथम बैच का शुभारंभ किया गया था, जिसमें अभी तक 37 चयनित प्रशिक्षणार्थी को 45 दिवसों, की कुशल ट्रेनरों के माध्यम से प्रशिक्षण संपन्न कराया गया तत्पश्चात् प्रशिक्षणर्थियों को इंदौर, छिंदवाड़ा इत्यादि शहरों में संबंधित ट्रेडस अनुसार सुनिश्चित जॉब प्लेसमेण्ट दिलाया गया है जो कि एक सकारात्मक प्रयास का सूचक है ।

जिला पंचायत डिण्डौरी के द्वारा प्रतिवर्ष 900 अभ्यार्थियों को प्रशिक्षण देने के साथ यथा संभव शत्-प्रतिशत जॉब प्लेसमेंट के साथ-साथ एक वर्ष तक प्रत्येयक लाभार्थी से व्यतक्ति्गत सम्पयर्क करने का वार्षिक लक्ष्य रखा गया हैं।

प्रशिक्षण का उद्देश्य:

मुख्य रूप से व्यवसायिक ट्रेड प्रशिक्षण का उद्देश्य है, कि जिले में बेरोजगार युवा वर्ग को उनके योग्यता, दक्षता एवं अभिरूचि के अनुसार प्रचलित व्यावसायिक ट्रेड में प्रशिक्षण दिलाया जाकर प्रतिष्ठित संस्थानों में सुनिश्चित एवं स्थायित्व जॉब दिलाकर आत्मनिर्भर बनाना।





2. बांस एवं काष्ठ आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम:

डिण्डौरी जिला प्राकृतिक संपदाओं से आच्छादित है। यहां पर काष्ठ एवं बांस की उपलब्धता पर्याप्त संख्या है। इसी संपदा का उपयोग करते हुए जिले के हस्तशिल्प कारीगर विभिन्न कलाकृतियों में निर्माण किया जाता है। इन कारीगरों को कौशल उन्नयन तथा आमदनी में वृद्धि के उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत कारीगरों को मार्केट डिमांड अनुसार विभिन्न कलाकृतियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कलाकृतियों का मुल्य निर्धारण, पैकेजिंग तथा मार्केट एक्सपोजर कराकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही आधुनिक मशीनों पर कार्य कराकर नवीन कार्य सिखाया जा रहा है।

प्रशिक्षण का उद्देश्य:

जिले में काष्ठ कला में अभिरूची रखने वाले लोगो को बांस एवं काष्ठ आधारित उत्पादनों का प्रशिक्षण देकर रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड सके। इसके साथ कारीगरों को नवीन मार्केट से जोड़ना तथा आमदनी में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज कराना।

क्रियान्वयन प्रक्रिया:

आदिवासी विकास एवं कल्याण विभाग द्वारा हितग्राहियों को कांउसलिंग उपरान्त चयनित किया जाता है। यह प्रशिक्षण पूर्णतः आवासीय है जिसका वित्त पोषण आदिवासी विकास एवं कल्याण विभाग द्वारा किया जा रहा है। प्रशिक्षण पश्चात हितग्राहियों को हाथ के औजार (टूलकिट) उपलब्ध कराये जाते है जिसका उपयोग करते हुए हितग्राही पूर्ण रूप से बांस एवं काष्ठ आधारित उत्पादन करने में निपुण हो कर बाजार की मांग अनुसार नये-नये डिजाईन का निर्माण करते हैं। वर्तमान में कुल 20 हितग्राही मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का लाभ प्राप्त कर अपना उद्योग स्थापित करके स्वरोजगार से जुड रहे है। हितग्राही स्वयं का उत्पादन कार्य करने के साथ-साथ प्रशिक्षण संस्था के द्वारा दिये गये डिजाईनों के अनुसार उत्पादन करेंगें जिसकी बिक्री के लिए प्रशिक्षण प्रदाय संस्था द्वारा क्रय-विक्रय कर पूर्ण सहयोग प्रदान किया जा रहा है।


3. टसर रेशम धागाकरण कार्यक्रम:

डिण्डौरी जिले गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की महिलाओं को टसर धागाकरण कार्य का प्रशिक्षण देकर निरन्तर स्वरोजगार उपलब्ध कराने हेतु वर्ष 2014-15 में जिला प्रशासन डिण्डौरी के सहयोग से टसर धागाकरण प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की गई।

प्रशिक्षण का उद्देश्य:

आईएपी योजनांतर्गत विस्तृत कार्ययोजना अंतर्गत भवन निर्माण, धागा मशीन इत्यादि प्रदान किये गये हैं।

क्रियान्वयन प्रक्रिया:

टसर धागाकरण कार्य के प्रशिक्षण हेतु पात्र 20 महिलाओं का चयन कर 03 माह का प्रशिक्षण दिया गया। अगले चरण में महिलाओं को केन्द्रीय रेशम बोर्ड के मास्टर टेªनर द्वारा प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण हेतु राॅ-मटेरियल (कच्चा माल) कोसाफल तथा प्रशिक्षणार्थियों को छात्रवृत्ति रेशम विभाग द्वारा उपलब्ध कराया गया। प्रशिक्षण कार्य पूर्ण होने के पश्चात महिला हितग्राही टसर धागाकरण कार्य कर स्वरोजगार प्राप्त कर रही है तथा इसके परिणामस्वरूप महिलाओं को प्रारम्भिक स्तर पर प्रतिमाह 3 से 4 हजार रूपये की आमदनी प्राप्त हो सकेगी। पूर्ण प्रक्रिया से महिला समूह का टसर धागाकरण कार्य कौशल विकसित होगा तथा उनके आर्थिक स्तर में वृद्धि के साथ-साथ उनका सामाजिक स्तर बढेगा, जिसका प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष लाभ उनके बच्चो के रहन-सहन व शिक्षा पर पडे़गा, साथ ही उनके परिवार की वार्षिक आय में वृद्धि होगी। इसी प्रकार मलबरी क्षेत्र में ग्राम मोहगांव जिला डिण्डौरी में उपलब्ध शहतूत उद्यान एवं अन्य ग्रामीण अंचलों के कृषकों की निजी उपलब्ध भूमि पर शहतूत पौधारोपण से कृमिपालन कर मलबरी ककून उत्पादन किया जा रहा है, जिससे हितग्राही लाभांवित हो रहे है। डिण्डौरी जिले में उत्पादित मलबरी ककून का धागाकरण कार्य जिले में ही किये जाने हेतु मलबरी डुपियान मशीन के संस्थापन का कार्य पूर्ण हो चुका है।


4. सुरक्षा गार्ड प्रशिक्षण कार्यक्रम:

ग्रामीण आजीविका मिशन का मूल उद्देश्य है कि ग्रामीण युवाओं की क्षमता एवं कौशल को पहचानकर उन्हें प्रशिक्षित कर उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।

प्रशिक्षण का उद्देश्य:

ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षित तथा शारीरिक क्षमतावान युवाओं को सुरक्षा गार्ड का प्रशिक्षण प्रदान कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला पंचायत के तत्वाधान में आजीविका मिशन जिले के युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर रोजगार से जोड़ने का काम किया जा रहा है।

क्रियान्वयन प्रक्रिया:

ग्रामीण आजीविका मिशन डिण्डौरी के द्वारा ऐसी संस्थाओं का चयन किया गया जो युवाओं को सुरक्षा गार्ड के प्रशिक्षण प्रदान कर सकें। समाचार पत्रों के माध्यम से युवाओं के चयन की जानकारी प्रसारित कर निर्धारित दिनांकों को जिले में केम्प आयोजित कर मेरिट सूची के वरीयता क्रम में युवाओं को सुरक्षा गार्ड प्रशिक्षण हेतु चयनित किया जा रहा है।

प्रशिक्षण हेतु चयनित युवाओं को 30 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण एससीसीआई सिक्यूरिटी एजेसी अनूपपुर द्वारा प्रदान किया जाता है। इस प्रशिक्षण के अंतर्गत Unarmed सिक्यूरिटी गार्ड के दायित्व, जिम्मेदारियां, अनुशासन, विषम परिस्थितियों की तैयारी एवं अन्य बारीकियां से अवगत कराया जाता है।


Website developed and designed by
National Informatics Centre,
District Unit Dindori(M.P.)
Content is provided, updated and managed by District Administration, Dindori